कैट की स्वदेशी कार्य प्रणाली से मिलेगा नया आयाम।

देश भर में 46 लाख विवाह-व्यापार, होटल और कैटरिंग सेक्टर को मिलेगा जबरदस्त फायदाप्रदेश में लगभग 1 लाख शादियों से लगभग 3500 करोड़ का व्यापार- ‘वोकल फॉर लोकल’ को मिलेगा प्रोत्साहनदेश के सबसे बड़े व्यापारी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय सचिव राजू सलूजा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र गांधी बिलासपुर इकाई के अध्यक्ष किशोर पंजवानी , महामंत्री हीरानंद जयसिंह , कोषाध्यक्ष आशीष अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष दिलीप खेंडेलवाल, संजय मित्तल, सुरेंद्र अजनानी, संगठन सचिव परमजीत उबेजा आदि ने संयुक्त रूप से बताया कि कैट की अनुसंधान शाखा कैट रिसर्च एंड ट्रेड डेवलपमेंट सोसाइटी (ब्त्ज्क्ै) के नवीनतम अध्ययन के अनुसार 1 नवंबर से 14 दिसंबर 2025 के बीच प्रदेश सहित देशभर में लगभग 46 लाख शादियाँ होंगी, जिनसे करीब लगभग ₹6.50 लाख करोड़ का व्यापार होने का अनुमान है।अध्ययन की मुख्य बातेंकुल शादियाँ (देशभर) : लगभग 46 लाखकुल अनुमानित व्यापार : लगभग ₹6.50 लाख करोड़प्रदेश में शादियाँ : लगभग 1 लाखप्रदेश का योगदान : लगभग ₹3500 करोड़तुलनात्मक रूप सेः2024 में 42 लाख शादियों से लगभग ₹5.90 लाख करोड़2023 में 38 लाख शादियों से लगभग ₹4.74 लाख करोड़2022 में 32 लाख शादियों से लगभग ₹3.75 लाख करोड़ का व्यापार हुआ था।कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया बिलासपुर के महामंत्री हीरानंद जयसिंह ने बताया कि इस वर्ष होने वाले विवाहों में खर्च का पैटर्न भी उल्लेखनीय है। शादी बजट के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर विभाजन लगभग इस प्रकार है- 3 प्रतिशत शादियाँ ₹1 करोड़ से ₹10 करोड़ के बजट में होंगी, जबकि 9 प्रतिशत शादियों का बजट ₹50 लाख से ₹1 करोड़ के बीच रहेगा। लगभग 25 प्रतिशत शादियाँ ₹25 लाख से ₹50 लाख के बजट में होंगी, और 22 प्रतिशत शादियाँ ₹15 लाख से ₹25 लाख की श्रेणी में आएँगी। वहीं सर्वाधिक 41 प्रतिशत शादियाँ ₹15 लाख से कम बजट में सम्पन्न होंगी। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि विवाह उद्योग हर वर्ग के लिए समान रूप से अवसर पैदा करता है और छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े सेवा प्रदाताओं तक सभी के लिए व्यापक आर्थिक संभावनाएँ उपलब्ध कराता है।शादी खर्च में वृद्धिहीरानंद जयसिंह , आशीष अग्रवाल , परमजीत उबेजा ने बताया कि इस वर्ष प्रति शादी खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। बढ़ती आय, कीमती धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी और त्योहारों के दौरान उपभोक्ता विश्वास बढ़ने से वेडिंग इंडस्ट्री में रिकॉर्ड उछाल दर्ज हुआ है।अध्ययन में यह सामने आया कि शादी से जुड़े 70 प्रतिशत से अधिक सामान अब भारतीय निर्मित हैं-परिधान, आभूषण, सजावट सामग्री, बर्तन, कैटरिंग आइटम आदि। कैट के “वोकल फॉर लोकल वेडिंग्स” अभियान के कारण चीनी लाइटिंग, इम्पोर्टेड डेकोरेशन, गिफ्ट एक्सेसरीज़ आदि की मांग में उल्लेखनीय गिरावट आई है। इससे भारतीय कारीगरों, ज्वैलर्स और वस्त्र उद्योग को बड़ा लाभ मिल रहा है।

प्रदेश का वेडिंग मार्केट लगभग – 3500 करोड़ का कारोबारछत्तीसगढ़ में अनुमानित 1 लाख शादियों के साथ लगभग ₹3500 करोड़ का व्यापार होगा। देवउठनी एकादशी के बाद से ही बैंड-बाजा-बारात का दौर शुरू हो चुका है और सभी भवन, रिसॉर्ट तथा मैरिज लॉन लगभग फुल बुक हैं।होटल एवं हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में 85-95 प्रतिशत तक बुकिंग रहने का अनुमान है, जो सामान्य दिनों से लगभग दोगुना है।ऽ डेस्टिनेशन वेडिंग्स, फैशन, ज्वैलरी और कैटरिंग में उछालऽ डेस्टिनेशन वेडिंग बुकिंग्स में 18-22 प्रतिशत वृद्धिऽ ज्वैलरी खरीद में 1-15 प्रतिशत वृद्धिऽ वेडिंग फैशन मार्केट (डिज़ाइनर वियर, मेकअप, ग्रूमिंग) में 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धिऽ ट्रांसपोर्ट, कैब, लाइटिंग, इवेंट लॉजिस्टिक्स में 30-35 प्रतिशत की बढ़ोतरीऽ प्रीमियम कैटरिंग व रीजनलक्यूज़ीन की मांग में 25 प्रतिशत वृद्धिडिजिटल वेडिंग ट्रेंड्स का विस्तारडिजिटल निमंत्रण, ऑनलाइन वेन्यूटूर, ऐप-आधारित फोटोग्राफी एडिट्स, वर्चुअल वेडिंग प्लानिंग जैसी सेवाओं में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है।शादी बजट का 1-2 प्रतिशत हिस्सा अब डिजिटल कंटेंट एवं सोशल मीडिया कवरेज पर खर्च किया जा रहा है।रोज़गार सृजनशादी सीजन 2025 से 1 करोड़ से अधिक अस्थायी और अंशकालिक रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

इससे डेकोरेटर, कैटरिंग, फ्लोरिस्ट, कलाकार, ट्रांसपोर्ट, हॉस्पिटैलिटी और एमएसएमई सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा।सरकार के लिए भारी राजस्वकैट के अनुसार यह 45 दिवसीय शादी सीजन सरकार को लगभग ₹75,000 करोड़ का टैक्स राजस्व (जीएसटी आदि) प्रदान करेगा।राजू सलूजा , हीरानंद जयसिंह, आशीष अग्रवाल , परमजीत ऊबेजा ने कहा ,“भारतीय वेडिंग इकॉनमी देश का सबसे बड़ा असंगठित किंतु अत्यंत प्रभावशाली क्षेत्र है। यह न केवल परंपरा और संस्कृति का संगम है, बल्कि व्यापार, रोजगार और आत्मनिर्भरता को गति देने वाला एक मजबूत आर्थिक इंजन भी है। ‘वोकल फॉर लोकल’ के तहत भारतीय उत्पाद अब हर विवाह समारोह की धड़कन बन चुके हैं।

  • प्रधान सम्पादक - रोहित मिश्र

    प्रधान संपादक रोहित मिश्र बिलासपुर छत्तीसगढ़ मो नं.- 8871247917

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